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उच्च माध्यमिक स्तर के छात्र छात्राओं में मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता का तुलनात्मक अध्ययन (Synopsis)

घटनोत्तर अनुसन्धान (Essay)

कालिंजर (अनछुए स्थल) प्रोजेक्ट रिपोर्ट

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कालिंजर प्रस्तावना: बुंदेलखण्ड वीरों को जन्म देने वाली धन-धान्य से समृद्ध एवं प्रकृति देवी की विश्राम भूमि है| इस भूमि के कण कण कण में शौर्य भरा हुआ है| यही कारण है कि यहाँ की अबलाओं ने भी वीरोचित साहसपूर्ण कार्य किये हैं, जिन्हें अछे-अछे रणकोविद धनुर्धर भी नहीं कर सकते| स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति देने वाली महारानी लक्ष्मीबाई इसी वीरभूमि बुन्देलखण्ड में ही थीं| इसी बुन्देलखन में महाराजा   छत्रसाल जैसे शूरवीर राजाओं ने जन्म लेकर हिन्दू जाति एवं भारतीय संस्कृति की रक्षा की थी| बुंदेलखंड के जनपदों में बाँदा जनपद अपनी महान विशेषताओं के कारण प्रख्यात है| यह भूमि ऐतिहासिक, धार्मिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक सभी दृष्टियों से विशेष महत्वपूर्ण है| महर्षि नामदेव ने यहीं पर अपना सिद्धाश्रम बनाया था| महाराज विराट की नगरी यही बाँदा नगर ही है, जहाँ के पाण्डव लोगों ने अपने विपत्ति के दिनों में शरण पायी थी| इसी प्रकार इस परम्प्रसिद्ध बाँदा मंडल के अंतर्गत अनेक तीर्थ स्थान हैं| विन्ध्य गिरी की ङ्लाओं से सुशोभित होने वाले इस बुंदेलखंड की वीर प्रसवनी वसुंधरा के अंतर्गत बाँदा जनप...

कालिंजर (अनछुए स्थल) E-Brochure

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       कालिंजर  ऐतिहासिक विरासत ऐतिहासिक पृष्ठभूमि कालिंजर उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले में स्थित कालिंजर बुंदेलखंड का ऐतिहासिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नगर है| प्राचीन काल में यह जेजाकभुक्ति (जयशक्ति चंदेल) साम्राज्य के अधीन था| यहाँ का किला भारत का सबसे विशाल और अपराजेय किलों में एक माना जाता है| 9 वीं से 15 वीं शताब्दी तक यहाँ चंदेल शासकों का शासन था| चंदेल राजाओं के शासनकाल में कालिंजर पर महमूद गजनवी, कुतुबुद्दीन ऐबक, शेर शाह सूरी और हुमांयु ने आक्रमण किये लेकिन जीतने में असफल रहे| अनेक प्रयासों के बावजूद मुगल कालिंजर के किले को जीत नहीं पाए| अंततः 1569 में अकबर ने यह किला जीता और अपने नवरत्नों में एक बीरबल को उपहारस्वरुप प्रदान किया| बीरबल के बाद यह किला बुन्देल राजा छत्रसाल के अधीन हो गया| छत्रसाल के बाद किले पर पन्ना के हरदेव शाह का अधिकार हो गया| 1812 में यह किला अंग्रेजों के नियंत्रण में आ गया| एक समय कालिंजर चारों ओर से ऊंची दीवारों से घिरा हुआ था और इसमें चार प्रवेश द्वार थे| कालिंजर दुर्ग  वर्तमान में कामता द्वार, पन्ना द्वा...

आचार्य रजनीश के शैक्षिक दर्शन का आधुनिक भारतीय परिप्रेक्ष्य में मूल्यांकन (research paper)

  आचार्य रजनीश के शैक्षिक दर्शन का आधुनिक   भारतीय परिप्रेक्ष्य में मूल्यांकन पूजा चौरसिया * f'k{kk dk tks orZeku Lo:i vkt gekjs lkeus gS mldk bfrgkl cgqr iqjkuk gSA 'krkfCn;ksa ls vusd egkiq:"kksa us vius fopkjksa ,oa d`fr;ksa }kjk blesa viuk ;ksxnku fn;k gSA f’k{kk dh vo/kkj.kk] f’k{kk ds mn~ns’;] f’k{k.k fof/k vkfn f’k{kk 'kkL= ds vusd i{k gSaA ftuesa le;≤ ij ifjorZu gksrs jgs gSaA ijUrq mu ifjorZuksa ds ewy Lkzksr fofHkUUk f’k{kk&nk’kZfudksa ds fopkj gh gSaA vkpk;Z jtuh’k ¼1931&1990½ vius le; ds dzkfUrdkjh fopkjdksa esa ls gSaA thou dks mldh lexzrk esa tkuus] thus vkSj iz;ksx djus ds os thou izrhd gSaA os vk/kqfud lUr gSa] tks iwoZ ds v/;kRe ,oa if’pe ds foKku ds leUo; esa fo’okl j[krs gSaA izR;sd f’k{kk&nk’kZfud dk f’k{kk n’kZu mlds lekU; n’kZu ij vk/kkfjr gksrk gSA f’k{k.k&dyk] f’k{kk n’kZu ds y{;ksa ds dk;Z :i esa ifjf.kr djus dk ek/;e gSA vkpk;Z jtuh’k vf}rh; izfrHkk’kkyh gSa ,oa eq[; :i ls mudk {ks= /keZ] n’kZ...